Posted in Bhajan

Radha-Kishan

Written Day: Monday, August 08, 1994

राग: घुघट की आड़ से… (फिल्म: हम है राही प्यार के)


राधा के प्यार बिना गिरिधर का, गोकुल सुना लगता है

जब तक न मिले बासुरीकी ज़लक…

      ये रास अधुरा रहेता है… राधा के…

राधा-किशन का मिलना ज़रूरी है

      पनघट पे खेलना ज़रूरी है

पायलिया जब राधाकी खनकती है

      सुनकर कृष्णा का  दिल भी बहेलता है

बिना उसकी पायल से गोकुल का… ये खेल अधुरा रहेता है… जब तक…

भर निंदर में राधिका रोती है…

      कहाँ खो गए श्याम ऐसा कहेती है…

कहेती कहेती राधा फिर रोती है

      आशुओके खटियन पे सोती है

कहेती ही जाती है राधा सपनोकी ये दास्ताँ हो…

बिना मेरे श्याम मेरे जीवन का… संगीत सुना सुना लगता है…

      जब तक न मिले…

 

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